रुड़की में ‘प्रतिभा सम्मान समारोह’ में शामिल हुए CM पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को हरिद्वार जिले के रुड़की स्थित एक सरकारी सेकेंडरी स्कूल में आयोजित ‘प्रतिभा सम्मान समारोह’ में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की ओर से किया गया था।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने राज्य की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के 27 उत्पादों को अब तक ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल चुका है।धामी ने कहा कि GI टैग मिलने से इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान मजबूत हुई है। साथ ही, स्थानीय उत्पादकों, किसानों, कारीगरों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को नए बाजार उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर कीमत और रोजगार के अधिक अवसर मिल रहे हैं।

इससे पहले 25 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘समरसता संकल्प अभियान’ की राज्य स्तरीय कार्यशाला में हिस्सा लिया था।गुरु रविदास महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनकी शिक्षाएं और आदर्श आज भी समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास का जीवन समानता, मानवता, सामाजिक न्याय और सद्भाव की प्रेरणा देता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास ने समाज को छुआछूत, भेदभाव और जाति आधारित असमानता जैसी कुरीतियों से ऊपर उठने का संदेश दिया। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, कर्म और मूल्यों से होनी चाहिए।

धामी ने संत रविदास की सरल और सच्ची भक्ति की अवधारणा का उल्लेख करते हुए उनके प्रसिद्ध संदेश ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ को याद किया। उन्होंने कहा कि यह संदेश आज भी मन की पवित्रता और सामाजिक सद्भाव का मार्ग दिखाता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास ने ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां सभी के साथ सम्मान का व्यवहार हो, भेदभाव के लिए कोई जगह न हो और कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। उनका ‘बेगमपुरा’ का विचार—दुख और असमानता से मुक्त समाज—आज भी एक आदर्श के रूप में लोगों का मार्गदर्शन करता है।धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश संत रविदास के सामाजिक सद्भाव और अंत्योदय के आदर्शों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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